भर चुका है पाकिस्तान के कर्ज का घड़ा, खतरे में अर्थव्यवस्था और जनता का भविष्य

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत लगातार खराब हो रही है, ऐसे में यह खबर आ रही है कि सार्वजनिक कर्ज बढ़कर 27.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इससे वहां की अर्थव्यवस्था और जनता का भविष्य खतरे में पड़ गया है.

पाकिस्तान का सार्वजनिक कर्ज बढ़कर 27.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इस तरह पाकिस्तान अब कर्ज के लिए निर्धारित उच्चतम सीमा को भी पार कर चुका है और अर्थव्यवस्था तथा उसके लोगों का भविष्य खतरे में पड़ गया है.

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) द्वारा हाल में जारी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है. पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने यह अनुमान जारी किया था कि 2018-19 में पाकिस्तान का वित्तीय घाटा जीडीपी के 7.9 फीसदी तक होगा और 2019-20 में यह बढ़कर 8.7 फीसदी हो जाएगा.

मौजूदा वित्त वर्ष में पाकिस्तान का कर्ज-जीडीपी अनुपात बढ़कर 72.2 फीसदी तक पहुंच गया है और 2019-20 में यह बढ़कर 75.3 फीसदी तक पहुंच जाएगा.

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पाकिस्तान के राजकोषीय जवाबदेही और कर्ज सीमा एक्ट 2005 के मुताबिक सरकार इस बात के लिए बाध्य है कि सार्वजनिक कर्ज की मात्रा घटाए और उसे सही सीमा के भीतर रखे. इसके तहत कहा गया था कि वित्तीय घाटे को 2017-18 से प्रयास शुरू कर तीन साल के भीतर जीडीपी के 4 फीसदी और उसके बाद 3.5 फीसदी तक लाया जाएगा.

इसमें यह भी कहा गया था कि कुल सार्वजनिक कर्ज को भी घटाकर अगले दो वित्तीय वर्ष के भीतर जीडीपी के 60 फीसदी तक लाया जाएगा. लेकिन यह कानून कमजोर माना जाता है, क्योंकि इसके उल्लंघन पर सरकार पर कोई जुर्माना नहीं लगता है.

पूर्व की नवाज शरीफ सरकार ने भी कर्ज के इस कानून का काफी उल्लंघन किया था. उनके दौर में साल 2017-18 में वित्तीय घाटा जीडीपी के 6.5 फीसदी तक पहुंच गया था, जबकि मान्य सीमा 4 फीसदी ही थी. दुर्भाग्य से पाकिस्तान के मौजूदा पीएम इमरान खान के कार्यकाल में भी पिछले कुछ महीनों में हालात और बदतर ही हुए हैं.

पाकिस्तान में मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई दर करीब 7.5 फीसदी रही है और ब्याज दर करीब 10.75 फीसदी है. कानून के मुताबिक वित्त मंत्री इस बात के लिए बाध्य हैं कि संसद को कर्ज सीमा पार करने की जानकारी दें और उसकी वजह बताएं. केंद्रीय बैंक इस बारे में समय-समय पर सरकार को चेताता भी रहा है, लेकिन सरकारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है.

इमरान सरकार खस्तहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रही है.  पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहे वित्त मंत्री असद उमर ने हाल में इस्तीफा दे दिया है. पतन की तरफ बढ़ती अर्थव्यवस्था और IMF पैकेज मिलने में हो रही देरी की वजह से पिछले महीने पाकिस्तान की S&P वैश्विक रेटिंग में क्रेडिट स्कोर भी लुढ़क गया था.

हाल में केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट की भविष्यवाणी की थी और पांच वर्षों में सबसे ज्यादा महंगाई के दौर में ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला किया था. पाकिस्तान की करेंसी रुपये के मूल्य में भी दिसंबर 2017 के बाद से 35 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. हर 10 में से 4 पाकिस्तानी को पेट भर खाना नहीं मिल रहा.