ICICI बैंक को झटका, तिमाही नतीजे के बाद आज बाजार में खूब पिटाई

भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन निराशाजनक रहा. खासकर बैंकिंग सेक्टर को करारा झटका लगा है. ICICI बैंक का शेयर मंगलवार को 4 फीसद टूट गया. कंपनी के वित्तीय परिणाम की घोषणा के बाद शेयर भाव में गिरावट आई है.

भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन निराशाजनक रहा. खासकर बैंकिंग सेक्टर को करारा झटका लगा है. ICICI बैंक का शेयर मंगलवार को 4 फीसद टूट गया. कंपनी के वित्तीय परिणाम की घोषणा के बाद शेयर भाव में गिरावट आई है.

ICICI बैंक के शेयर टूटे

बीएसई में ICICI बैंक के शेयर 3.77 फीसदी टूटकर 386.25 रुपये पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 4.33 फीसदी टूटकर नीचे 384 रुपये तक चला गया था. वहीं नेशनल स्टाक एक्सचेंज (NSE) में बैंक का शेयर 3.76 फीसदी गिरकर 386.20 रुपये प्रति इक्विटी पर बंद हुआ.

बता दें, प्राइवेट क्षेत्र के ICICI बैंक का एकीकृत शुद्ध लाभ 2018-19 की चौथी तिमाही में 2.45 प्रतिशत बढ़कर 1,170 करोड़ रुपये रहा. बैंक ने सोमवार को वित्तीय परिणाम की घोषणा की.

शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट

मंगलवार को शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट देखी गई. मुख्य रूप से टाटा मोटर्स, ICICI बैंक, भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 4.60 फीसदी तक की गिरावट से सेंसेक्स नीचे आया.

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 323.71 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 38,276.63 अंक पर बंद हुआ. बीएसई सूचकांक कारोबार के दौरान 38,236.18 से 38,835.54 अंक के दायरे में रहा. इसी प्रकार, एनएसई निफ्टी 100.35 अंक की गिरावट के साथ 11,497.90 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 11,484.45 से 11,657.05 अंक के दायरे में रहा.

वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव

सेंसेक्स के शेयरों में एचयूएल, एल एंड टी, पावरग्रिड, इन्फोसिस, ओएनजीसी और बजाज ऑटो 1.37 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए. एशिया के अन्य बाजारों में चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक बढ़त में रहा. वहीं जापान तथा कोरिया के बाजार नुकसान में रहे. यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी शुरूआती कारोबार में गिरावट का रुख रहा.

यही नहीं, अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध और कंपनियों के वित्तीय परिणाम के फीके रहने से निवेशकों का उत्साह प्रभावित हुआ है. घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में तेजी रही, लेकिन चीन-अमेरिका तनाव पर दिन में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्द के बयान से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई और स्थानीय बाजार में बिकवाली दबाव बढ़ गया.